एयरपोर्ट अथॉरिटी ने ड्रोन से करवाई पामाइश: डंपिंग साइट की दूरी 10 किमी से कम निकली, हो सकती है रिजेक्ट

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हिसार18 घंटे पहलेलेखक: राजेश सैनी

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हिसार में ढंढूर में डंपिंग स्टेशन। एयरपोर्ट की जद में आने से इसे शिफ्ट किया जाएगा। - Dainik Bhaskar

हिसार में ढंढूर में डंपिंग स्टेशन। एयरपोर्ट की जद में आने से इसे शिफ्ट किया जाएगा।

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साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए देखी जा रही नगर निगम की तीसरी साइट भी रिजेक्ट हाे सकती है। ढूंढर से करीब 4किलाेमीटर दूरी पर काजला व न्याेली गांव के बीच रकबा बीड़ में देखी गई 22 एकड़ जमीन भी एयरपाेर्ट की जद मेंआती दिख रही है।

एयरपाेर्ट अथाेरिटी ने हाल ही में नगरनिगम से ड्राेन से पैमाइश कराने व पैमाइश रिपाेर्ट मांगी है। इसके बाद ही नगर निगम अधिकारियाें ने पिछले सप्ताह ही ड्राेन से पैमाइश कर रिपाेर्ट एयरपाेर्ट अथाेरिटी काे भेज दी है। रिपाेर्ट केआधार पर एयरपाेर्ट जद से 22 एकड़ जमीन की दूरी बायएयर 7.28किलाेमीटर है। नियमाें के अनुसार यह जमीन एयरपाेर्ट बाउंडरी से 10किलाेमीटर दूर हाेनी चाहिए। बाईराेड 20किलाेमीटर से अधिक दूरी मगर आसमान से सीधी पैमाइश में करीब 7.28किलाेमीटर

नगरनिगम अधिकारियाें की मानें ताे एयरपाेर्ट से प्रस्तावित साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की जमीन की दूरी बाय राेड 20किलाेमीटर के करीब है। इसके अलावा ड्राेन से सीधे हवा में पैमाइश की गई ताे यह दूरी 7.28किलाेमीटर बनती है।

राजेश सैनी | हिसार

साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए देखी जा रही नगर निगम की तीसरी साइट भी रिजेक्ट हाे सकती है। ढूंढर से करीब 4किलाेमीटर दूरी पर काजला व न्याेली गांव के बीच रकबा बीड़ में देखी गई 22 एकड़ जमीन भी एयरपाेर्ट की जद में आती दिख रही है।

एयरपाेर्ट अथाेरिटी ने हाल ही में नगरनिगम से ड्राेन से पैमाइश कराने व पैमाइश रिपाेर्ट मांगी है। इसके बाद ही नगर निगम अधिकारियाें ने पिछले सप्ताह ही ड्राेन से पैमाइश कर रिपाेर्ट एयरपाेर्ट अथाेरिटी काे भेज दी है। रिपाेर्ट के आधार पर एयरपाेर्ट जद से 22 एकड़ जमीन की दूरी बायएयर 7.28किलाेमीटर है। नियमाें के अनुसार यह जमीन एयरपाेर्ट बाउंडरी से 10किलाेमीटर दूर हाेनी चाहिए। बाईराेड 20किलाेमीटर से अधिक दूरी मगर आसमान से सीधी पैमाइश में करीब 7.28किलाेमीटर

नगरनिगम अधिकारियाें की मानें ताे एयरपाेर्ट से प्रस्तावित साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की जमीन की दूरी बाय राेड 20किलाेमीटर के करीब है। इसके अलावा ड्राेन से सीधे हवा में पैमाइश की गई ताे यह दूरी 7.28किलाेमीटर बनती है।

जानिए… क्या कहता है नियम

एयरपाेर्ट अथाेरिटी की मानें ताे साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट एयरपाेर्ट जद से 10किलाेमीटर दूर हाेना चाहिए। इसके अलावा 10 से 20किलाेमीटर की दूरी हाे ताे एयरपाेर्ट अथाेरिटी से एनआेसी के आधार पर अनुमति मिल सकती है। अगर 20किलाेमीटर के दायरे से बाहर ताे एनआेसी की भी जरूरत नहीं है।

ताेशाम, कैमरी व राजगढ़ राेड पर पंचायती जमीन हैं विकल्प

एयरपाेर्ट से निर्धारित दूरी पर अगर नगरनिगम साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाना चाहता है ताे निगम काे ताेशाम राेड, कैमरी राेड व राजगढ़ राेड पर जमीन की तलाश करनी चाहिए। इन एरिया में अगरकिसी पंचायत की जमीन मिल जाए ताे यह प्लांट लगाने में काेई बाधा नहीं आएगी। क्याेंिक नगर निगम पिछले दाे दशक में यह तीसरी जगह तलाश रहा है। सबसे पहले ढंढूर के पास हाइवे पर करीब 18 एकड़ जमीन पर डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। फिर ढंढूर से ढाई किलाेमीटर आगे ठसका के नजदीक 32 एकड़ जमीन जीएलएफ से खरीदकर इस पर प्लांट लगाने की प्लानिंग की मगर यह एयरपाेर्ट विस्तार के कारण रुक गया।

आम लाेगाें पर क्या असर : दरअसल, साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न लगने से इसका सीधा असर आम लाेगाें पर पड़ रहा है। क्याेंिक बिना सेग्रीगेशन के कूड़ा सीधा साइट पर पहुंच रहा है। साथ ही इससे अलग अलग तरह का पाॅल्यूशन बढ़ रहा है। क्याेंिक वेस्ट हर घर से निकलना है। अगर साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लग जाएगा ताे इस वेस्ट से खाद, बिजली इत्यादि भी बनाई जा सकती है। इसके अलावा प्लास्टिक वेस्ट काे रिसाइकिलकिया जा सकता है।

क्या है जमीन काे लेकर स्थिति

22 एकड़ जमीन जीएलएफ से लेने के िलए नगरनिगम की तरफ से केस बनाकर मुख्यालय भेजा जा चुका है।निगम अधिकारियाें ने जीएलएफ के स्थानीय स्तर के अधिकारियाें के साथ पत्राचारकिया गया है।

एयरपाेर्ट अथाेरिटी की मानें ताे साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट एयरपाेर्ट जद से 10किलाेमीटर दूर हाेना चाहिए। इसके अलावा 10 से 20किलाेमीटर की दूरी हाे ताे एयरपाेर्ट अथाेरिटी से एनआेसी के आधार पर अनुमति मिल सकती है। अगर 20किलाेमीटर के दायरे से बाहर ताे एनआेसी की भी जरूरत नहीं है।

ताेशाम, कैमरी व राजगढ़ राेड पर पंचायती जमीन हैं विकल्प

एयरपाेर्ट से निर्धारित दूरी पर अगर नगरनिगम साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाना चाहता है ताे निगम काे ताेशाम राेड, कैमरी राेड व राजगढ़ राेड पर जमीन की तलाश करनी चाहिए। इन एरिया में अगरकिसी पंचायत की जमीन मिल जाए ताे यह प्लांट लगाने में काेई बाधा नहीं आएगी। क्याेंिक नगर निगम पिछले दाे दशक में यह तीसरी जगह तलाश रहा है। सबसे पहले ढंढूर के पास हाइवे पर करीब 18 एकड़ जमीन पर डंपिंग प्वाइंट बनाया गया। फिर ढंढूर से ढाई किलाेमीटर आगे ठसका के नजदीक 32 एकड़ जमीन जीएलएफ से खरीदकर इस पर प्लांट लगाने की प्लानिंग की मगर यह एयरपाेर्ट विस्तार के कारण रुक गया।

आम लाेगाें पर क्या असर… : दरअसल, साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न लगने से इसका सीधा असर आम लाेगाें पर पड़ रहा है। क्याेंिक बिना सेग्रीगेशन के कूड़ा सीधा साइट पर पहुंच रहा है। साथ ही इससे अलग अलग तरह का पाॅल्यूशन बढ़ रहा है। क्याेंिक वेस्ट हर घर से निकलना है। अगर साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लग जाएगा ताे इस वेस्ट से खाद, बिजली इत्यादि भी बनाई जा सकती है। इसके अलावा प्लास्टिक वेस्ट काे रिसाइकिलकिया जा सकता है।

क्या है जमीन काे लेकर स्थिति

22 एकड़ जमीन जीएलएफ से लेने के िलए नगरनिगम की तरफ से केस बनाकर मुख्यालय भेजा जा चुका है।निगम अधिकारियाें ने जीएलएफ के स्थानीय स्तर के अधिकारियाें के साथ पत्राचारकिया गया है।

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